रविवार, 15 जनवरी 2012

सुजितक अनुभव रिपोर्टर डायरीमे

जितेन्द्र झा
                         जनकपुरधाममे हाल पत्रकारितामें  सक्रिय सुजीत कुमार झाक अनुभव आ विचारसभ समेटल रिपोर्टर डायरी नामक संस्मरण प्रकाशित भेल अछि । मैथिली भाषामे प्रकाशित एहि कृतिक प्रकाशक आफन्त नेपाल नामक गैर सरकारी संस्था अछि । ओ जनकपुरमे काज करबाक क्रममे रिपोर्टिंग, घुमफिर आदिके क्रममे कएल अनुभवके डायरीमे समेटने छथि । संस्मरणमे जनकपुरक आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक मुद्दासभके समेटबाक प्रयास कएल गेल अछि । लेखक मिथिला डट कम मैथिली पत्रिकाक सम्पादक छथि । डायरीमे संग्रहित संस्मरण डट कममे विभिन्न समयमे प्रकाशित भऽ चुकल अछि । प्रस्तुत अछि डायरीक किछु महत्वपुर्ण अंश ।

मैथिली विकास ट्रष्ट : नाम उच्च काम तुच्छ
मिथिला नाट्य कला परिषदक २०६८ साउन महिनामे भेल साधारण सभामे मैथिली विकास ट्रष्ट कोषपर हम कसिकऽ बजलहु“ । हमरा एहिपर जोड देवाक आशय छल, एहि विषयपर बहस होइक । अहु दूआरे जे ओहि समारोहमे ट्रष्ट कोषक सदस्य सचिव आ दू गोट सदस्य उपस्थित छलथि । मुदा ओसभ किछु नहि वजलथि । किएक नहि वजलथि ? हमरा नहि बुझल अछि ।
ट्रष्ट कोष नहि चलला सँ ककरा फाइदा भऽ रहल अछि ? या त एकरा पूर्णतः बन्द कऽ देल जाए, नहि तऽ काज शुरु कएल जाए । एहि दूनुपर वहस आवश्यक अछि । बन्द करव कोनो दृष्टि स“ बढिया नहि हैत । एक तऽ मैथिलीक नामपर कतहु स“ पैसा अवैत नहि अछि, जँ एवो कएल तऽ काज नहि भेल आ पैसा फिर्ता चलि जाएत । एहि सँ दुर्भाग्य आओर की भऽ सकैत अछि !
मैथिली विकास ट्रष्ट कोषकेँ संयोजक छथि मैथिलीक वरिष्ठ साहित्यकार डा.राजेन्द्र विमल, सदस्य सचिवमे नेपाल संगीत तथा नाट्य प्रज्ञा प्रतिष्ठानक प्राज्ञ रमेश रंजन, सदस्यमे पूर्वाञ्चल विश्व विद्यालयक उपकुलपति डा. रामावतार यादव, मिथिला नाट्य कला परिषदक अध्यक्ष सुनिल मल्लिक, नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक प्राज्ञ राम भरोष कापड़ि भ्रमर, जिल्ला विकास समिति धनुषाक पूर्व सभापति राम चरित्र साह, एकीकृत नेकपा माओवादीक नेता रोशन जनकपुरी, मिथिला राज्य संघर्ष समितिक संयोजक परमेश्वर कापड़ि आ रामानन्द युवा क्लवक पूर्व अध्यक्ष जीवनाथ चौधरी । ई सभ असफलताक मुंह कहियो देखवे नहि कएने छथि । हिनकासभक निष्ठापर प्रश्ने नहि उठाओल जा सकैत अछि । मुदा कोषके काज देखलापर मस्तिष्कमे वनल सभ प्रभाव समाप्त भऽ जाइत अछि । जिल्ला विकास समितिक कोषक ई हाल अछि तऽ सरकारक कोषके की हाल हैत ? मैथिलीक विकास किएक नहि भऽ रहल अछि । एकर छोट उदाहरण अहु सँ लेल जा सकैत अछि । किओे कहता पैसा नहि अछि तएं काज नहि होइत अछि । मुदा एहि ठाम तऽ पैसो अछि तैयो काज नहि भऽरहल अछि ।                                   


के सुनत बेचनके राग ?

बेचन पासवान मिथिलाक चर्चित गायक । धनुषा होइ, महोत्तरी होइ वा काठमाण्डूए, सभ ठामक लोक हिनका चिन्हैत छन्हि । कनिको–मनिकोमे बेचन गीत गाबि देतोक सोँचि लोक हिनका बजालैत अछि । काठमाण्डूक बडका लोकसभके गीत सुनयकेँ मन भेल तऽ बेचनकेँ बजा लैत अछि । मुदा, बेचन आइ कोन अवस्थामे जी रहल छथि, ककरो नहि बुझल हैत । ओ पैसाक लेल घर–घर भटकि रहल छथि । फुटल तबलाके छराबय हेतु देला महिनो भऽ गेल छन्हि । मुदा पैसा नहि छन्हि जे चमरा लग सँ तबला अनता । खायो पर आफत छन्हि । बिना साजक कें गीत सुनत ! बेचन आ गायक उदित नारायण झा मित्र रहथि । आर्थिक स्थिति तहिया दूनुकेँ समाने छल । काठमाण्डूमे कतेको ठाम दूनु सँगे गीत गएने छथि । काठमाण्डूमे संर्घष करैत काल बेचन नेतासभके चम्चागिरीकेँ प्राथमिकता देलन्हि आ उदित नारायण करियरकेँ । आइ उदित नारायण सँगे रहितथि तऽ बेचनोके एहन स्थिति नहि रहैत ?

घर–घरमे दारु भठ्ठी !

धनुषा जिल्लामे अवैध दारुक भठ्ठी सञ्चालित अछि ई वात हमरा मात्र नहि बहुतो गोटेके बुझल अछि । गोरख यादवक“े सोहनी सिंगरजोरामे रहल भठ्ठी तोडयगेल पुलिस टोली सँग रिपोर्टिङ्गके लेल हमहु“ गेल छलहु“ । ओहि ठाम पुलिस दारुसभ नष्ट कऽ भठ्ठीमे आगि सेहो लगौने छल । मुदा एहिवेर धनुषाक धनौजी गबिसक धनौजी आ भररिया तहिना औरही कप्टौलमे दारु देखलहु“ त चकित रहि गेल छलहु“ । विश्वास नहि भऽ रहल अछि जे धनुषामे अवैध दारुक कारोवार एहि रुप स“ वढि गेल अछि । हमरा एहि तीनू गाममे जाय स“ पूर्व लगैत छल गोरख यादव, सवैलाक जयसवाल, इनरवाक राजा गोइत, फुलगामाक किछु व्यक्ति मात्र ई कारोवार करैत छथि । मुदा सत्य एहि सँ फरक अछि । कतेको घरमे पुलिस दारु नष्ट कएलक । ओ घर सभ बाहर सँ बहुत सम्भ्रान्त जका“ लगैत छल मुदा भितर गेलाकवाद किछु आओर छल । धनुषाक तत्कालीन प्रहरी उपरीक्षक दिनेश आमात्य टोलीक नेतृत्व कएलाक कारण दारु नष्ट करव औपचारिकता नहि रहि गेल छल । एकटा घरमे पुलिस दारु नष्ट करय लेल पहु“चल तऽ गृहणी बरियातीकेँ पियावयके लेल दारु किन कऽ अनने जानकारी देलन्हि । मुदा भितर गेलाकवाद तऽ माहोले किछु आओर छल । ओहि घरमे मात्र पाँच सय लिटर सँ वेसी तैयारी दारु आ ओतवे संख्यामे कच्चा दारु भेटल छल ।





साहित्यकार रोशन जनकपुरी 
पत्रकारक चुनाव सुन्धारामे सुरापान

नेपाल पत्रकार महासंघक राष्ट्रिय अधिवेशन २०६८ बैशाख २०÷२१ गते सम्पन्न भेल । केन्द्रीय पार्षदक रुपमे हमहु“ सहभागी भेल छलहु“ । पार्षदक रुपमे हमर ई पहिल सहभागिता छल से नहि मुदा जे आनन्द एहिबेर लागल से कहियो नहि लागल छल । सुन्धारामे ठहरबाक व्यबस्था कएल गेल छल । सभ पत्रकारके“ ओहि एरियामे रखलाक कारण विशेषे चहल–पहल होयव स्वभाविक छल । भोजन कएलाकवाद किछु गोटे, दाइ दोहरी हेर्न जाउ“ ..कहय बला सभ सेहो भेटलथि । चुनावमे भोट पएबाक लेल किछु गोटे मु“ह स“ पोलहा रहल छलथि तऽ किछु उम्मेदवार दारुके“ बोतल लऽ कऽ आएल छलथि ।
काश हमहु“ दारु पिवैत रहितहु“ तऽ कतेक पिबतहु“ – कतेक । दिनमे टेक्सीपर काठमाण्डू घुमावयवला सभ सेहो भेटल । दोहरी डिस्को फाइव स्टारक भोजनक किछु गोटे मित्रसभ लाभ उठौलन्हि । ओहो सभ अपन–अपन खेत बेच कऽ ओना कऽ रहल छलथि से नहि । हुनको सभके“ किओ आओर फण्डीङ्ग कएने छल । व्यापारी, तस्कर, गलत कमायवला नेतासभ दाता रहथि । काठमाण्डूमे लगैत छल एहिना भोट होइत रहितैक आ हमसभ ऐश करैत रहितहु“ । अपना आपके“ समीक्षा करैत छी तऽ काठमाण्डूमे वितायल आनन्द प्रश्न कऽ रहल अछि की पत्रकारक इहे काज अछि ? किए एतेक मह“ग भऽ रहल अछि पत्रकारक चुनाव ? सभ्य समाजक कल्पना करयवला कलमजीविसभ स्वयं विकृति बढावयमे तऽ नहि लागल अछि । एक दू दिनक ऐश अरामलेल पत्रकारक संस्था बदनाम तऽ नहि भऽ रहल अछि ? 




बैकुण्ठ जी, महन्थक गरिमा बुझियौ

रत्न सागर स्थानक छोटे महन्थ बैकुण्ठ दास २०६८ अखारमे जिल्ला अदालत धनुषाक एक न्यायधिशक निर्णय सँ भलेही साधारण तारेखमे
रिहा भऽ गेल होइथ मुदा समाज एखनो हुनका बहुतो केशमे अपराधी मानैत अछि । जाहि व्यक्तिके“ देखि कऽ मोनमे श्रद्धा जगवाक चाही ओ व्यक्तिके“ देखि कऽ लोकके“ डर लगैत अछि । हमरा जहिया बैकुण्ठ जी स“ परिचय भेल छल त ओ कहलथि, ‘पाकिस्तान सँ डाक्टरी पढने छी ।’ डाक्टर भऽ कऽ बाबाजीबला काज कनीकाल लेल उटपटांग अवश्य लागल छल । हुनका जनकपुरक सर्वशक्तिमान होवयके“ लालसा छन्हि । मन्दिरमे पैसाक“े कनेको अभाव नहि अछि । मुदा खेतपर खेत किया विका रहल अछि ? ओ अपन मन्दिरक जमीन बेचैत–बेचैत जमीनक दलाल भऽ गेल छथि । कतेको मन्दिर जमीनक कारण बरबाद भेल अछि । फेर ओहन बरबाद करयमे किछु महन्थमे हुनको हाथ अबैत अछि । पहिने हुनका स“ भेट होइत छल तऽ ओ मन्दिरके“ एना सुधार करव ओना सुधार करव कहैत छलाह मुदा बादमे बाबाजीसभपर टिप्पणी करय लगला । ओ पुलिसस“ केकर पकडाएबाक आ ककरो छोड़एबामे लागल रहल छथि ।
ओ न्यायालय के“ प्रभावित कऽ सकैत छथि । पत्रकारके“ अपन पक्षमे लिखावय मात्रे नहि मिडिया हाउस सेहो खोलि सकैत छथि । हुनकर निवासमे दिनभरि चटुकारसभक भीड लागल रहैत अछि । ओ सभ चाहैत अछि बैकुण्ठ जी आओर जमीन बेचौथि, आओर दलाली करौथि, चटुकारितो करव आ ऐशो हैत । जनकपुरक बहुतो मन्दिर एखन घर वा दोकानमे परिणत भऽ गेल । इहो भऽ जाएत । चटुकारसभके“ कोनो लेनादेना नहि अछि । सम्भवतः बैकुण्ठ जी विवाहो नहि कएने छथि । जे धियापुताके“ बहुतो रुपैया छोड़ि कऽ जाइ एकर लोभ हेतन्हि । फला“के पीट, फला“के मार बला बात छोड़ि इम्हर ध्यान मात्र देला स“ देखथुन कतेक प्रसन्नता होइत छन्हि ।


जनकपुरिया आम कत्तऽ गेल ?
जनकपुरमे उपलब्ध आमसभ जनकपुरक नहि रहैत अछि । एहि ठाम भारत सँ आएल आम प्रायः बिक्री होइत अछि । नेपालक कतहुँ–कतहुँ बिक्रियो भेल तऽ ओ उदयपुरक । जनकपुरक आम, बजार तक पहुँचिये नहि रहल अछि । एक समय छल जनकपुरक आम नेपालके सभ ठाम बिक्रिक लेल जाइत छल । कतेक व्यापारी तऽ भारत धरि सेहो सप्लाई करैत छल ।
२० वर्ष पूर्व एहि ठाम ततेक आम होइत छल जे व्यापारीसभ मालोमाल भऽजाइत छल । ओहि उमेरक सभ लोक देखने अछि । कहल जाइत छ्रैक मनुष्य की कुकुर नढिया सेहो आमक महिनामे मोटा जाइत छल ।
परिक्रमा सडक हुए वा जनकपुर–जलेश्वर, जनकपुर–ढल्केबर, सभ सडकके बगलमे आमक गाछ रहैत छल । तिरहुतिया गाछी, पहाडी गाछीमे ततेक आम फरैत छल जे लोक तोड़ि नहि सकैत छल । राम मन्दिरकेँ आगामे रहल राम पार्कमे सेहो आमक गाछ छल । जानकी मन्दिरक पाछुमे राम बाग छल ओतहुँ विभिन्न जातिक पूmलक अतिरिक्त आमक गाछ छल । जनकपुरक सभ मन्दिरके अलग–अलग आमक बगान छल ।
आम खाएकें लेल बहुतो लोक आमक महिनामे जनकपुर अबैत छल । मुदा आब नहि आमक बगान रहि गेल आ नहि आम । जनकपुर सँ बाहर जायबला बससभमे आम महिनामे आम भरल रहैत अछि मुदा ओ आम भारत सँ आएल रहैत अछि । काठमाण्डूमे जहिना बाहरके माछ राखि जनकपुरक माछ कहि ठकैती होइत अछि तहिना आमोमे ।

जुडशीतलके जोगाड
एहि सँ पहिने कहियो जुड़ शीतलमे थालमाटि नहि खेलने छलहुँ । पहिने थालक ठोप मात्र लगबैत छलहुँ । राम युवा कमिटी २ बर्षसँ थालमाटि खेलक कार्यक्रम रखैत आवि रहल अछि । ओना कही हमरे प्रयास सँ ई थालमाटि राखल गेल अछि । हम पहिने थालमाटिक रिपोर्टिङ्ग करबाक लेल धनुषाक गंगुली जाइत छलहुँ । कलाकार गुड्डु गंगुलीक नेतृत्वमे ओतय थालमाटिकेँ विशेष उत्सव होइत छल । एहि कार्यक्रमक सम्बन्धमे रामयुवा कमिटीक अध्यक्ष सोहन ठाकुरके आग्रह कएलिएन्हि जे राम युवा कमिटी सेहो एकर आयोजना किएक नहि करैत अछि ? एहि पर ओ सहमत भऽ गेलथि आ दू वर्षसँ ई पाबनि भऽ रहल अछि । कहियो ई पावनिकेँ पूरे मिथिलाञ्चलमे एक हप्ता पहिने सँ धुम रहैत छल मुदा सरकारी उदासिनता मात्र नहि एकरा समाप्त करबाक एकटा बडका प्रयास भेल । किछु वर्ष पूर्वधरि एहि दिन सँ नेपाालक एसएलसी परीक्षा शुरु होइत छल । जाहि सँ एहि पावनिकेँ बहुत हदधरि असर कएलक वा कही बसिया बड़ीभात खायमे सिमित कएलक । एकरा बचाबय परत । अहि पावनिमे रंग भरय परत । एक बेर फेर सँ मिथिलाकेँ शीतल शीतल करय परत ।

साहित्यकार शीतल झा 

पैसा दिअ भोट लिअ
धनुषा निर्वाचन क्षेत्र नम्बर ५ क उपनिर्वाचनक प्रचार–प्रसार कोना चलि रहल अछि, ई बुझबाक लेल २०६५ चैत १६ गते सखुवा महेन्द्रनगर पहु“चल छलहु“ की, तीन–चारि गोटे हमरा लग आबि कहैत अछि, ‘भाइजी, कोन पार्टीक प्रचारमे आएल छियै ? हम सभ तऽ निर्णय कयने छी, जे बेसी पैसा देत ओकरे भोट देबै ।’
‘पैसा ?’
‘ह“ । अहि बेर हम सभ खोलि कऽ पैसा मँगैत छियैक ।’
‘इन्ट्रेष्टिङ्ग !’
ओ सभ हमरा कोनो उम्मेदवार छी बुझिरहल छल । हम हुनका सभ स“ चाहलहु“ जे पैसा के की खेल भऽ रहल छैक से बुझबामे चलि आबए । तए“ बातके बढ़बैत हुनकँ सभ संगे रहल एक महिला स“ पुछलियन्हि, ‘की अहु“ के पैसा चाही ?’
ओ कनी क्रोधित होइत बजली, ‘किएक नहि, अहा“ सभ जखन हमर भोट लऽ कऽ ढौआढाकी कमा सकैत छी तऽ किए नहि हम सभ पैसा मा“गु ?’
‘कतेक गोटे देलक अछि ?’ हमर जिज्ञासा पर ओ कहली, ‘प्रचार शुरु होबय सँ पहिने बहुत किछु सुनने छलहु“ जे फला“ महासेठ, फला“ यादव, फला“ डाक्टर ठाड़ भेल छैक । बहुते पैसा भेटत मुदा एकटा स्वतन्त्र उम्मेदवार पचास रुपैया देलक तकरबाद किओ नहि देलक अछि ।’
ओ महिला स“गे रहल एकटा वृद्धा सेहो हमरा दिस ललचायल मुद्रामे ताकि रहल छली । हमरा लागल जे हुनक मुखाकृति कहि रहल अछि जे हम हुनका बिड़ी पिय लेल सेहो जँ पैसा नहि देबैक तऽ ओ हमरा कपडा फारि देती । तथापि हम हुनका दिस तकैत पुछलहु“, ‘दाइ अहा“के किओ पैसा देलक अछि की नहि ?’
‘एक दु गोटे कहलक अछि । मुदा की कहु“ अगो बेर ठैकि लेलक, अहुँ तऽ कम्तीमे एकरा सभके नहि ठकियौ ?’

                                                     विदेह' ९७ म अंक ०१ जनवरी २०१२ (वर्ष ५ मास ९ अंक ९७) में प्रकाशित

0 टिप्पणियाँ: